#EndSARS और नाइजीरिया में पुलिस सुधार की आवश्यकता 

अफ्रीका के लोग तेज़ी से एक दूसरे से जुड़ रहे हैं और पहले के मुक़ाबले वो ज़्यादा जागरुक हैं. साथ ही वो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को ज़्यादा तैयार हैं.

अफ्रीका के देशों में लोगों के प्रदर्शन की शुरुआत स्वतंत्रता संघर्ष के दिनों में हो गई थी और बाद में 80 के दशक में संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रमों से जुड़ी कठिनाइयों के ख़िलाफ़ संघर्ष हुए. 90 के दशक में अफ्रीका के ज़्यादातर हिस्सों में जो लोकतांत्रिक और राजनीतिक बदलाव हुए उस वक़्त भी कई राजनीतिक प्रदर्शन और आंदोलन हुए. लेकिन इसके बावजूद दशकों तक पश्चिमों देशों की ग़लतफ़हमी और नकारात्मक मीडिया कवरेज ने अफ्रीका में प्रदर्शनों की ख़ासियत और समानता की समझ में अड़चन डालने का काम किया. मौजूदा समय में प्रदर्शनों के कई उदाहरणों की पहचान की जा सकती है जैसे ट्यूनिशिया (2010) में राजनीतिक विद्रोह, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में राष्ट्रपति चुनाव (2018) की वजह से लोगों का प्रदर्शन और अल्जीरिया के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल अज़ीज़ बुतेफ्लिका और सूडान के पूर्व राष्ट्रपति उमर अल बशीर के इस्तीफ़े (2019) के लिए प्रदर्शन. अफ्रीका के लोग तेज़ी से एक दूसरे से जुड़ रहे हैं और पहले के मुक़ाबले वो ज़्यादा जागरुक हैं. साथ ही वो अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को ज़्यादा तैयार हैं. आम नागरिकों की सामूहिक सोच पूरे महादेश में तेज़ी से राजनीतिक संस्कृति और परंपरा का रूप तय कर रही है.

नाइजीरिया के हज़ारों नौजवानों ने देश पर शासन करने वाले संभ्रांत लोगों के ख़िलाफ़ अपने ग़ुस्से को जताया और व्यापक पुलिस सुधार और सरकारी उत्तरदायित्व की मांग की. इस प्रदर्शन की शुरुआत ऑनलाइन हैशटैग अभियान से हुई जो आगे चलकर सड़कों पर प्रदर्शन में तब्दील हो गया.

ताज़ा उदाहरण 8 अक्टूबर 2020 को नाइजीरिया में #EndSARS आंदोलन के इर्द-गिर्द आयोजित प्रदर्शन है जहां नाइजीरिया के हज़ारों नौजवानों ने देश पर शासन करने वाले संभ्रांत लोगों के ख़िलाफ़ अपने ग़ुस्से को जताया और व्यापक पुलिस सुधार और सरकारी उत्तरदायित्व की मांग की. इस प्रदर्शन की शुरुआत ऑनलाइन हैशटैग अभियान से हुई जो आगे चलकर सड़कों पर प्रदर्शन में तब्दील हो गया. कुछ हफ़्तों के भीतर नाइजीरिया के नौजवानों ने सफलतापूर्वक पुलिस के स्पेशल एंटी-रॉबरी स्क्वॉड (SARS) के ख़िलाफ़ आत्मनिर्भर और टिकाऊ प्रदर्शन का माहौल बना दिया.

कई मायनों में नाइजीरिया की पुलिस व्यवस्था को नकारने से जुड़ा #EndSARS अभियान शुरू होने का इंतज़ार कर रहा था. SARS न सिर्फ़ क्रूरता और ज़्यादती से जुड़ा था बल्कि ये सत्ता पर काबिज़ लोगों और नाइजीरिया के नौजवानों के बीच गंभीर अलगाव को भी दिखाता था. जब कोई सरकार लगातार सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक अधिकार देने और अपने नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम रहती है तो इसकी वजह से जो हताशा और निराशा पैदा होती है वो प्रदर्शन के रूप में सामने आती है. ये विद्रोह की वजह भी बन सकती है.

SARS न सिर्फ़ क्रूरता और ज़्यादती से जुड़ा था बल्कि ये सत्ता पर काबिज़ लोगों और नाइजीरिया के नौजवानों के बीच गंभीर अलगाव को भी दिखाता था.

1960 में स्वतंत्रता के समय से नाइजीरिया ने वही दुश्मनी वाली औपनिवेशक सुरक्षा प्रणाली बना रखी है जो स्थानीय आबादी को कुचलने के लिए पुलिस का इस्तेमाल करती है. हालांकि, लोगों की सुरक्षा के मुद्दे नाइजीरिया के राजनीतिक और नीतिगत संवाद में प्रवेश कर चुके हैं लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि ज़मीनी स्तर पर इसमें सार्थक बदलाव नहीं आया है. चूंकि पुलिस और पुलिस की ग़लतियों के सवालों को हमेशा नज़रअंदाज़ किया जाता रहा है और लंबे समय से उसे पीछे धकेला जाता रहा है, ऐसे में इन पर केंद्रित प्रदर्शनों और राजनीतिक आंदोलनों को सतह पर आना ही था.

SARS ‘पुलिस’ का इतिहास

SARS नाइजीरिया की पुलिस की एक शाखा है, जिसकी स्थापना 1992 में हिंसक अपराध, जिनमें सशस्त्र डकैती और अपहरण शामिल हैं, का मुक़ाबला करने के लिए किया गया था. ये उस वक़्त स्थापित कई रणनीतिक इकाइयों में से एक थी. SARS को चेहराविहीन और बिना हथियार की पुलिस इकाई बनना था. इसका मुख्य़ काम खुफ़िया सूचना इकट्ठा करके हिंसक डकैतियों को रोकने में मदद करना था. नाइजीरिया के हर राज्य में SARS पुलिस कमांड के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के तहत आता था. हालांकि शुरुआत में SARS कुछ हद तक कामयाब रहा लेकिन ये निहत्था, खुफ़िया सूचना पर आधारित पुलिस का मॉडल लंबे समय तक ऐसे नहीं रह पाया. बाद के वर्षों में SARS में काम करने वाले हिंसक अपराध को रोकने के लिए खुफ़िया जानकारी मुहैया कराने के अपने शुरुआती लक्ष्य से भटकने लगे और हथियार रखना, मनमाने ढंग से रोकना, बिना वजह लोगों पर नज़र रखना और यहां तक कि लोगों से पैसे की वसूली भी शुरू कर दी.

SARS को चेहराविहीन और बिना हथियार की पुलिस इकाई बनना था. इसका मुख्य़ काम खुफ़िया सूचना इकट्ठा करके हिंसक डकैतियों को रोकने में मदद करना था.

सितंबर 2016 में एमनेस्टी इंटरनेशनल की रिपोर्ट ने SARS के द्वारा यातना और बदसलूकी के दूसरे तरीकों समेत नियमों के उल्लंघन के बारे में बताया. रिपोर्ट में आरोप लगाए गए कि SARS के अधिकारी नियमित तौर पर अपनी हिरासत में बंदियों को यातना देते हैं और दूसरे क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक सलूक करते हैं. SARS के अधिकारी रिश्वत लेने के लिए भी कुख्य़ात थे और इसके लिए उन्हें ज़िम्मेदार ठहराए जाने के बदले उनका प्रमोशन किया जा रहा था. नाइजीरिया के लोग इस रिपोर्ट से हैरान नहीं थे क्योंकि वो SARS के अधिकारियों के द्वारा मानवाधिकार के उल्लंघन, उन्हें कोई सज़ा नहीं मिलने और उनके भ्रष्टाचार से वाकिफ़ थे. यहां तक कि जून 2020 में अपनी ताज़ा रिपोर्ट में भी एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जनवरी 2017-मई 2020 के बीच SARS के द्वारा यातना, बदसलूकी और ग़ैर-न्यायिक हत्या के कम-से-कम 82 मामलों का लिखित सबूत दिया है. SARS के ज़्यादातर पीड़ित कम आमदनी और कमज़ोर समूहों के 18 से 35 वर्ष के बीच के पुरुष हैं.

SARS के अधिकारी नियमित तौर पर अपनी हिरासत में बंदियों को यातना देते हैं और दूसरे क्रूर, अमानवीय या अपमानजनक सलूक करते हैं. SARS के अधिकारी रिश्वत लेने के लिए भी कुख्य़ात थे 

#EndSARS की मांग

#EndSARS अभियान कैसे आगे बढ़ा, ये संक्षेप में जानना ज़रूरी है. हाल के वर्षों में नाइजीरिया के हर हिस्से- ग्रामीण और शहरी दोनों- में ग़रीबी बढ़ी है. नाइजीरिया के ज़्यादातर लोगों का जीवन स्तर निम्न है. इसके अलावा कोविड-19 महामारी के फैलने, दुनिया भर में कच्चे तेल का दाम गिरने, बढ़ती महंगाई और महीनों की हड़ताल और शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने से नाइजीरिया की आर्थिक कठिनाई में काफ़ी बढ़ोतरी हुई. इससे भी बढ़कर नाइजीरिया की बेरोज़गारी और अल्प रोज़गार की दर हैरान करने वाले क्रमश: 27.1 और 28.6 प्रतिशत पर रही. इन परिस्थितियों ने नाइजीरिया के नौजवानों, बेरोजगारों को अलग-थलग कर, उन्हें हाशिये पर डाल देने के अलावा गुस्से से भी भर दिया है.

वैसे SARS के ज़ुल्म के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कोई नई बात नहीं है. पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रपति मुहम्मदू बुहारी के प्रशासन ने SARS को भंग करने या सुधार के कई वादे किए लेकिन उनमें से कोई भी अमल में नहीं लाया गया या वास्तविक बदलाव के रूप में नतीजा नहीं आया. #EndSARS आंदोलन की शुरुआत 2017 में हुई जब नाइजीरिया के नौजवानों ने SARS के द्वारा की गई ज़बरदस्त हिंसा को लेकर अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर इस हैशटैग का इस्तेमाल करके साझा किया.

#EndSARS आंदोलन की शुरुआत 2017 में हुई जब नाइजीरिया के नौजवानों ने SARS के द्वारा की गई ज़बरदस्त हिंसा को लेकर अपने अनुभवों को सोशल मीडिया पर इस हैशटैग का इस्तेमाल करके साझा किया. 

प्रदर्शनकारियों की शुरुआती मांग बिल्कुल सीधी थी: SARS को भंग करो, पुलिसिया ज़ुल्म करने वालों को ज़िम्मेदार ठहराओ और नाइजीरिया की पुलिस में सुधार करो. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को व्यापक बनाते हुए इसमें बेहतर शासन, क़ानून के राज के लिए सम्मान और मानवाधिकार के लिए सम्मान को भी शामिल किया. इन मांगों के मूल में नाइजीरिया के नौजवानों में बदलाव और अपने नेताओं से ज़्यादा उत्तरदायित्व की इच्छा थी. नौजवानों का मानना है कि नेताओं ने ठीक ढंग से देश की सेवा नहीं की है.

लेक्की टोल गेट नरसंहार

प्रदर्शन ने उस वक़्त दुर्भाग्यपूर्ण हिंसक रूप अख्त़ियार कर लिया जब नाइजीरिया के सशस्त्र बलों ने 20 अक्टूबर की शाम को लागोस राज्य के लेक्की टोल गेट पर निहत्थे और शांतिपूर्ण #EndSARS प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी. एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ इस “ग़ैर-न्यायिक हत्या” में कम-से-कम 12 प्रदर्शनकारी मारे गए. दूसरी न्यूज़ एजेंसियों के द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक इससे भी ज़्यादा लोगों की मौत हुई. इस घटना के अगले दिन नाइजीरिया की सरकार ने देशव्यापी कर्फ्य़ू का आदेश दिया जिसका मक़सद असरदार ढंग से प्रदर्शन को बंद करना और भीड़ को तितर बितर करना था. लागोस के गवर्नर ने सबसे पहले पीडितों के साथ सहानुभूति जताई और उसके बाद ये भी दावा किया कि लेक्की टोल गेट पर 20 अक्टूबर की घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. ये सोशल मीडिया पर साझा की गई अनगिनत वीडियो फुटेज के विपरीत था. सेना का जवाब तो और भी ज़्यादा संदेह पैदा करने वाला था क्योंकि उसने मौक़े पर अपनी मौजूदगी की ख़बरों का खंडन किया जबकि लाइव फुटेज में सेना की मौजूदगी और हिंसक कार्रवाई दिख रही थी.

#EndSARS के लिए आगे क्या है

पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शनकारियों पर हिंसक सैन्य कार्रवाई और नाइजीरिया के कई राज्यों में अनगिनत कर्फ्यू की वजह से सड़कों पर प्रदर्शन काफ़ी हद तक कम हो गए हैं. इसके अलावा राष्ट्रपति बुहारी ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में प्रदर्शन होने पर एक और कार्रवाई की धमकी का संकेत दिया. इस वक़्त सरकार पर भरोसा सबसे कम है. #EndSARS आंदोलन और लेक्की गोलीबारी ने हिंसा के डर से रक्षा करने वाले संस्थानों में नागरिकों का अविश्वास और बढ़ाया है. हालांकि, फिलहाल प्रदर्शन में कमी आई है लेकिन लोगों को ऐसा लग रहा है कि ये आंदोलन फिर रफ़्तार पकड़ सकता है क्योंकि नाइजीरिया के युवा अपनी शक्ति और संगठन की क्षमता को पहचानते हैं और बदलाव की मांग करेंगे.

सरकार की तरफ़ से भरोसा दिया गया कि SARS की जगह अच्छी तरह प्रशिक्षित बल लाया जाएगा जो मानवाधिकार को कायम रखेगा, नाइजीरिया के लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं हो रहा है क्योंकि सरकार ने बार-बार उचित पुलिस सुधारों के अवसरों को गंवाया है. 

राष्ट्रपति बुहारी के प्रशासन ने लोगों के कड़े विरोध के बाद 11 अक्टूबर को SARS को भंग कर दिया लेकिन स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स टीम (SWAT) के नाम से एक नई पुलिस इकाई की स्थापना की गई है जो SARS की ज़िम्मेदारियों को निभाएगी. ये परेशान करने वाला घटनाक्रम है क्योंकि SARS के अधिकारियों की फिर से तैनाती की जाएगी, वैसे इसका विवरण अभी साफ़ नहीं है. ये भी साफ़ नहीं है कि पिछली ग़लतियों के लिए अधिकारियों पर मुक़दमा चलाया जाएगा या नहीं. बार-बार सरकार की तरफ़ से भरोसा दिया गया कि SARS की जगह अच्छी तरह प्रशिक्षित बल लाया जाएगा जो मानवाधिकार को कायम रखेगा, नाइजीरिया के लोगों को सरकार पर भरोसा नहीं हो रहा है क्योंकि सरकार ने बार-बार उचित पुलिस सुधारों के अवसरों को गंवाया है.

फिलहाल के लिए #EndSARS आंदोलन और उसके समर्थकों के बारे में लगता है कि वो अपनी कुछ प्रमुख मांगों को मनवाने की कोशिश पर ध्यान देंगे: स्वतंत्र और पारदर्शी तरीक़े से लेक्की टोल गेट शूटिंग की जांच हो और पुलिस के ख़िलाफ़ गंभीर शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र संस्था की स्थापना हो. प्रदर्शन तो शुरुआत है जो भविष्य में समुदाय आधारित और खुफ़िया जानकारी पर आधारित पुलिस व्यवस्था की धुरी बन सकता है. ये तो सिर्फ़ समय बताएगा कि #EndSARS के लिए आगे क्या है लेकिन एक चीज़ निश्चित है: आंदोलन का बिना पद वाला नेतृत्व और उसका अनोखापन भविष्य में नाइजीरिया में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन के लिए आदर्श बन सकता है.

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